टांडा उड़मुड़, 18 अप्रैल (वरिंद्र शर्मा ) :इलाके की प्रमुख शिक्षा संस्था विक्टोरिया इंटरनैशनल स्कूल टांडा में विश्व विरासत दिवस मौके करवाए गए जागरूकता समागम दौरान बच्चो को इतिहासिक धरोहरों और इस दिन अहमियत बारे बताया गया | स्कूल के डायरेक्टर नीरू मुल्तानी के दिशा निर्देशों अधीन हुए इस समागम दौरान स्टूडेंट्स ने अपने विरासती स्मारकों, इमारतों को संभालने और कभी भी नुक्सान नहीं पहुंचने की सपथ ली | इस दौरान चौथी कक्षा के इंचार्ज राजविंदर कौर और एक्टिविटी कोआर्डिनेटर सुजाता छाबड़ा ने बच्चो को बताया कि दुनियाभर में कई ऐसी विश्व विरासत या धरोहरें हैं जो वक्त के साथ जर्जर होती जा रही हैं। इन विरासतों के स्वर्णिम इतिहास और इनके निर्माण को बचाए रखने के लिए विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। यह दिन हर उस देश के लिए खास है जो अपनी संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों, यूनिक निर्माण शैली, इमारतों और स्मारकों की खूबसूरती को बरकरार रखना चाहता है और आने वाली हर पीढ़ी को इनके महत्व के बारे में बताना चाहता है। दुनिया में कई सारी विश्व धरोहरें हैं। यूनेस्को हर साल लगभग 25 धरोहर को विश्व विरासत की लिस्ट में शामिल करता है, ताकि उन धरोहरों का संरक्षण किया जा सके।
विश्व धरोहर दिवस का इतिहास :
शिक्षकों ने बताया कि 1968 में एक अंतरराष्ट्रीय संगठन ने दुनिया भर की प्रसिद्ध इमारतों और प्राकृतिक स्थलों की सुरक्षा का प्रस्ताव पहली बार प्रस्तुत किया था, जिसे स्टॉकहोम में आयोजित हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पारित कर दिया गया। उसके बाद यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर की स्थापना हुई। उस समय 18 अप्रैल 1978 में विश्व स्मारक दिवस के तौर पर इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई। उस दौरान विश्व में कुल 12 स्थलों को ही विश्व स्मारक स्थलों की सूची में शामिल किया गया था। स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि
हर देश का अपने अतीत और उस अतीत से जुड़ी कई सारी गौरव गाथा है। इन गौरव गाथा की कहानी बयां करती हैं वहां स्थित तात्कालिक समय के स्मारक और धरोहरें। युद्ध, महापुरुष, हार-जीत, कला, संस्कृति आदि को इतिहास के पन्नों पर दर्ज करने के साथ ही उनके सबूत के तौर पर इन स्थलों को सदैव जीवित रहना जरूरी है।

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